क्या HMPV वायरस कोरोना वायरस का भाई है??
अभी वर्तमान के समय में HMPV वायरस एक नया काल बनकर उभर रहा है । दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं की कोरोनावायरस का उत्पत्ति चीन के वुहान लैब से हुआ था। जिस तरह का न्यूज़ हम सब के बीच है उससे साफ जाहिर है की HMPV वायरस एक बार फिर से चीन से ही पूरी दुनिया में फैल रही है। लेकिन एक सच यह भी है इस वायरस का उत्पत्ति जहां भी हो पर चीन में नहीं हुआ है। क्योंकि इस वाइरस को 2001 में सबसे पहले नीदरलैंड में पाया गया था इतना ही नहीं, इसकी पुष्टि 2024 में मलेशिया में भी की गई थी। शुरुआत के दिनों में नीदरलैंड में इसकी कहर कुछ खास नहीं थी ।लेकिन 2024 में इस वायरस से लगभग 320 लोग प्रभावित हुए थे।
Corona Virus से सम्बंध।
अगर इसकी संबंध कोरोनावायरस से निकाला जाए तो यह कुछ खास संबंध नहीं साझा करता है। क्योंकि संबंध साझा करने के लिए अनुवांशिक पदार्थ जिसको की जेनेटिक मैटेरियल भी कहते हैं उनका पूर्ण रूप से एक होना अनिवार्य होता है। HMPV वायरस एक RNA Virus है जिसका RNA की नकारात्मक रूप से मुड़ा हुआ है। जबकि कोरोनावायरस का RNA सकारात्मक रूप से मुड़ा हुआ है
Genetic material या अनुवांशिक पदार्थ क्या होता है??
अनुवांशिक पदार्थ दो तरह का होता है एक DNA दूसरा RNA. दोनों ही अनुवांशिक पदार्थ करोड़ों वर्ष से संजीव के gene की संरचना में अहम भूमिका निभा रही है इस धरती पर के सभी जीव जंतु, पेड़ पौधा, बैक्टीरिया ,सेवाल ,प्रोटोजोआ तथा इसके अलावा भी अन्य तरह के छोटे संजीव ,सभी का अनुवांशिक पदार्थ या तो डीएनए से बना होता है या तो RNA से बना होता है। लेकिन अनुवांशिक पदार्थ में या तो डीएनए जीन कोडिंग में काम करेगा या RNA. ऐसा नहीं हो सकता है की डीएनए और आरएनए एक साथ जिन को एक्सप्रेस कर रहा है।
HMPV वायरस का लक्षण।
जहां तक की बात करें वायरस की और उनके तुरंत अपना रूप बदला लेने की ,तो यह सब उनके अनुवांशिक पदार्थ जो की अधिकांश समय RNA होता है ,उस पर निर्भर करता है। जहां तक की डीएनए एक स्थाई पदार्थ है उसमें तुरंत बदलाव नहीं आता है। जिस वजह से वह जीव संरचना को इतना जल्दी नहीं बदलता है लेकिन आरएनए में तुरंत बदलाव आने के कारण वह जीव की संरचना को तुरंत बदल देता है जिसके कारण उस जीव का रूपरेखा, कार्य प्रणाली, सब तुरंत बदल जाता है।
वायरस के रूप बदलने का उदारहरण।
अगर इसका उदाहरण देखे तो ,2019 में कोरोना का अलग-अलग वेरिएंट का उत्पत्ति इस चीज को दर्शाता है की किस तरह से वायरस में म्यूटेशन होता है। अगर म्यूटेशन नहीं होता तो कोरोना जिस समय आया था उसके कुछ दिन के बाद ही किसी भी प्रकार के एक वैक्सीन से उसका उपचार किया जा सकता था। लेकिन उसमें म्यूटेशन का दर इतना ज्यादा था की कुछ ही समय में उसकी संरचना बदल जा रहा था ।जिसके कारण एक वैक्सीन सिर्फ एक ही स्ट्रेन पर काम कर रहा था और कुछ ही समय में उसका स्ट्रेन बदल जा रहा था जिसके कारण वह वैक्सीन दूसरे स्ट्रेन पर कारगर नहीं होता था।
HMPV वायरस का असर।
अगर अब बात करें इन दोनों वायरस का असर के बारे में तो यह दोनों ही शोषण तंत्र को प्रभावित करता है जहां पर की कोरोना शुरुआत में अपनी बदलती स्ट्रेन के कारण एक भयानक रूप दिखा रहा था। पर HMPV वायरस के साथ ऐसा कुछ नहीं है यह भी श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है लेकिन उतना बुरी तरह से नहीं जितना की कोरोना का शुरुआती स्ट्रेन किया था।
HMPV वायरस का शुरुआती लक्षण।
अगर इसकी लक्षण का बात करें तो इसका प्रमुख लक्षण है ।
.सांस लेने में दिक्कत
.नाक जाम होना
.गला में दर्द करना
. सांस लेने में रुकावट होना
. बुखार
.खांसी
ये सब कुछ आम लक्षण है ।
लेकिन अगर HMPV वायरस बहुत समय से किसी शरीर में सक्रिय है तो वह श्वसन तंत्र का गंभीर बीमारी भी करवा सकता है, जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, ब्रोंचिएक्टेसिस तथा पहले से रह रहे कोई और स्वसन तंत्र की बीमारी को बढ़ावा देना और उसकी गंभीरता को और बढ़ाना यह सब काम यह वायरस कर सकता है अगर इसकी उपचार समय पर नहीं किया गया तो।
धन्यवाद.